Photo by Jahra Tasfia Reza on <a href="https://www.pexels.com/photo/stack-of-homemade-shortbread-cookies-on-wooden-board-39852764/" rel="nofollow">Pexels.com</a>
नई दिल्ली: लोकप्रिय बिस्कुट ब्रांड प्रियागोल्ड एक गंभीर विवाद को लेकर चर्चा में है। कंपनी के निर्माण संयंत्र में बिस्कुट बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की गुणवत्ता और फैक्ट्री में साफ-सफाई को लेकर सवाल उठे हैं। खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने मामले में कार्रवाई करते हुए निर्माता कंपनी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं
मामले के अनुसार, उपभोक्ता की शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कंपनी के निर्माण संयंत्र का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसी चोकर की बोरियां मिलीं, जिन पर पशु चारे के लिए इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख था। आरोप है कि इस सामग्री का उपयोग बिस्कुट में फाइबर के स्रोत के रूप में किया जा रहा था।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने उत्पादन परिसर में स्वच्छता, कच्चे माल के रखरखाव और कीट नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं में भी कमियां पाए जाने की बात कही। खाद्य पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और साफ-सफाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती है।
कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में निर्माता कंपनी सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कंपनी के लाइसेंस के निलंबन और अभियोजन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। मामले में खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
बिस्कुट खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए जरूरी बात
इस मामले के सामने आने के बाद खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि प्रियागोल्ड के सभी बिस्कुट असुरक्षित हैं या बाजार में उपलब्ध हर उत्पाद पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में जांच के निष्कर्ष और नियामक की आधिकारिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है। उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर दी गई जानकारी, निर्माण एवं समाप्ति तिथि और पैकेजिंग की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
