Photo by Maurício Mascaro on <a href="https://www.pexels.com/photo/anonymous-people-standing-on-street-among-smoke-during-protests-at-night-4636148/" rel="nofollow">Pexels.com</a>
पेरिस: फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और सरकारी सेवाओं को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। 17 अक्टूबर को देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में हालात तनावपूर्ण हो गए। शांतिपूर्ण रैलियों के बीच कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। दुकानों में लूटपाट, वाहनों में आगजनी और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांस के गृह मंत्री ने प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोगों के शामिल होने की जानकारी दी, जबकि प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने लगभग 1,200 गिरफ्तारियों की पुष्टि की। पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबरें सामने आई हैं। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में गिरफ्तारियों और घायलों की संख्या में अंतर है।
क्यों सुलग रहा है फ्रांस?
फ्रांस में मौजूदा असंतोष की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी, कक्षाओं में बढ़ती भीड़ और बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति को लेकर छात्रों के विरोध से हुई थी। धीरे-धीरे यह आंदोलन महंगाई, ईंधन की ऊंची कीमतों, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति जैसे व्यापक मुद्दों तक फैल गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ती जीवन-यापन लागत के कारण आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। वहीं, शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं ने युवाओं में नाराजगी को और बढ़ाया है।
