मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने बताया कि 2026 की पहली छमाही में देश का कुल राजस्व 42 प्रतिशत घट गया। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य सुरक्षा, स्थानीय कृषि उत्पादन और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
युद्ध और ऊर्जा संकट से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था
कतर के अमीर ने 13 अक्टूबर को शूरा परिषद के वार्षिक सत्र के उद्घाटन के दौरान देश की आर्थिक स्थिति और भविष्य की रणनीति पर बात की। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने और रास लफान औद्योगिक क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने से देश के निर्यात पर गंभीर असर पड़ा है।
कतर दुनिया के प्रमुख तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में गैस निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं का असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ा है। अमीर के मुताबिक, इस अवधि में सरकारी खर्च में भी 14 प्रतिशत की कमी आई, लेकिन जरूरी सेवाओं और विकास संबंधी प्राथमिकताओं से समझौता नहीं किया गया।
खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की तैयारी
अमीर ने खाद्य सुरक्षा को भविष्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए स्थानीय कृषि उत्पादन बढ़ाने, खाद्य पदार्थों के भंडारण और परिवहन व्यवस्था बेहतर बनाने तथा खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करने पर जोर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट के समय नागरिकों की जरूरतों को पूरा करना और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। कतर पहले से ही खाद्य आपूर्ति के वैकल्पिक मार्गों और रणनीतिक भंडार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की योजना
कतर सरकार अब ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ गैर-ऊर्जा क्षेत्रों में भी निवेश और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य भविष्य में वैश्विक संकटों के दौरान अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाए रखना है।
अमीर ने कहा कि देश को केवल पुरानी आर्थिक स्थिति में लौटने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संकट से सीख लेकर अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना चाहिए। आने वाले पांच वर्षों में लगभग 221 अरब कतरी रियाल के निवेश और परियोजनाओं का पोर्टफोलियो भी तैयार किया गया है।
कतर का यह कदम बताता है कि ऊर्जा निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए युद्ध और आपूर्ति बाधाएं कितनी बड़ी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे हालात में खाद्य सुरक्षा, स्थानीय उत्पादन और जरूरी वस्तुओं के पर्याप्त भंडारण का महत्व और बढ़ जाता है।
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