सोशल मीडिया और TV डिबेट में फिर से ये बात छिड़ गई है: “पासपोर्ट सिर्फ ट्रैवल डॉक्यूमेंट है”। लोग अक्सर पासपोर्ट को नागरिकता या पहचान का सबसे बड़ा सबूत मान लेते हैं, पर कानून की नजर में ऐसा नहीं है।
पासपोर्ट असल में क्या है? 3 जरूरी बातें
- कानूनी मतलब: पासपोर्ट भारत सरकार द्वारा जारी किया गया एक ऑफिशियल डॉक्यूमेंट है। इसका मकसद सिर्फ विदेश यात्रा करना और विदेश में भारतीय दूतावास से मदद लेना है
- नागरिकता का सबूत नहीं: Citizenship Act 1955 के हिसाब से नागरिकता जन्म, वंश, रजिस्ट्रेशन से मिलती है। पासपोर्ट सिर्फ ये दिखाता है कि सरकार आपको अपना नागरिक मानती है। पासपोर्ट रद्द भी हो सकता है अगर नागरिकता फर्जी निकली
- मुख्य काम: दूसरे देश में एंट्री-एग्जिट, वीजा लगवाना, इमिग्रेशन पर पहचान देना। बस इतना ही
ये बहस क्यों शुरू हुई?
- NRC/CAA वाली बहस: जब NRC पर चर्चा हुई थी, तब कई नेताओं ने कहा था “पासपोर्ट नागरिकता का प्रूफ नहीं है”। इससे लोगों में कंफ्यूजन फैल गया
- हर डॉक्यूमेंट का अलग काम: आधार = रेजिडेंस प्रूफ, वोटर ID = वोटिंग राइट, जन्म प्रमाण पत्र = जन्म का सबूत। पासपोर्ट = सिर्फ इंटरनेशनल ट्रैवल
- गलतफहमी: कई लोग सोचते हैं पासपोर्ट है तो नागरिकता पक्की है। पर 2003 से पहले OCI/PIO वाले विदेशी भी भारतीय पासपोर्ट ले सकते थे
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
वकीलों के मुताबिक: “पासपोर्ट prima facie यानी शुरुआती सबूत तो है, पर आखिरी सबूत नहीं। अगर बाद में पता चले कि नागरिकता फर्जी थी, तो सरकार पासपोर्ट कैंसिल कर सकती है”
