September 11, 2026
a mountain with snow and rocks under a cloudy sky

Photo by Abdul Kayum on <a href="https://www.pexels.com/photo/a-mountain-with-snow-and-rocks-under-a-cloudy-sky-25252026/" rel="nofollow">Pexels.com</a>

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल हिमालय को लेकर वैज्ञानिकों को समय-समय पर ऐसे प्रमाण मिलते रहे हैं, जो बताते हैं कि आज जहां आसमान छूती पर्वत चोटियां दिखाई देती हैं, वहां कभी समुद्र हुआ करता था। हिमालयी क्षेत्र में मिली समुद्री अवसादी चट्टानें और उनमें मौजूद जीवाश्म इसके महत्वपूर्ण प्रमाण माने जाते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय का निर्माण भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से हुआ। करोड़ों साल पहले भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ी और यूरेशियाई प्लेट से टकराई। इस प्रक्रिया के दौरान दोनों प्लेटों के बीच मौजूद प्राचीन टेथिस सागर (Tethys Sea) के तल में जमा चट्टानें और समुद्री अवसाद ऊपर उठते गए।



यही वजह है कि आज हिमालय के कई हिस्सों में ऐसी चट्टानें मिलती हैं जिनकी संरचना समुद्री वातावरण में बनने वाली चट्टानों से मेल खाती है। कुछ स्थानों पर समुद्री जीवों के जीवाश्म भी पाए गए हैं।

कैसे समुद्र से बना दुनिया का विशाल पर्वत?

लगभग 5 करोड़ साल पहले भारतीय प्लेट की यूरेशियाई प्लेट से टक्कर तेज हुई। दोनों महाद्वीपीय प्लेटों के टकराने से धरती की परत में अत्यधिक दबाव पैदा हुआ। इसके परिणामस्वरूप चट्टानों की परतें मुड़ने और ऊपर उठने लगीं और धीरे-धीरे हिमालय जैसी विशाल पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ।

इस प्रक्रिया को आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाता। भारतीय प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ रही है, जिसके कारण हिमालय क्षेत्र में भूगर्भीय गतिविधियां जारी रहती हैं और यहां भूकंप आने का खतरा भी बना रहता है।

चट्टानों में छिपी है प्राचीन समुद्र की कहानी

हिमालय में मिलने वाली चूना-पत्थर और अन्य अवसादी चट्टानों में वैज्ञानिकों को समुद्री वातावरण से जुड़े संकेत मिलते हैं। इन चट्टानों और जीवाश्मों के अध्ययन से यह समझने में मदद मिलती है कि हिमालय बनने से पहले इस क्षेत्र का भूगोल कैसा था।

इसका अर्थ यह नहीं है कि आज की हिमालयी चोटियों के ठीक नीचे हाल के समय में समुद्र मौजूद था। वैज्ञानिक प्रमाण करोड़ों वर्ष पुराने भूगर्भीय इतिहास की ओर संकेत करते हैं।

माउंट एवरेस्ट भी इसी भूगर्भीय कहानी का हिस्सा

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट भी हिमालय के इसी भूगर्भीय इतिहास का हिस्सा है। एवरेस्ट की चट्टानों में भी ऐसे अवसादी और समुद्री मूल से जुड़े प्रमाण पाए गए हैं, जो बताते हैं कि पर्वत निर्माण से पहले इस क्षेत्र में समुद्री वातावरण मौजूद था।

हिमालय की चट्टानों में दर्ज यह इतिहास वैज्ञानिकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पृथ्वी की प्लेटों की गति, पर्वत निर्माण और करोड़ों वर्षों में बदलते भूगोल को समझने में मदद मिलती है।

यानी आज की बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियां कभी प्राचीन समुद्र के तल का हिस्सा रही थीं—और पृथ्वी की टेक्टोनिक शक्तियों ने उस समुद्री तल को उठाकर दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में बदल दिया।

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