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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स अपने दिन के ऊपरी स्तर से करीब 1,400 अंक तक फिसल गया। दिन के अंत में सेंसेक्स 777.88 अंक यानी 1.04 प्रतिशत गिरकर 74,003.82 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 279 अंक यानी 1.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,118.60 पर बंद हुआ। निफ्टी करीब पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया।
निवेशकों को करीब ₹9 लाख करोड़ का झटका
अचानक आई बिकवाली से शेयर बाजार में निवेशकों की संपत्ति में अनुमानित ₹9 लाख करोड़ की कमी आई। खास तौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव अधिक रहा और दोनों सेगमेंट के प्रमुख सूचकांक 2 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हुए।
गिरावट की 5 बड़ी वजह
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए महंगे तेल से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता बाजार पर दबाव डालती है। - अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई। इससे निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी और उभरते बाजारों से पूंजी निकलने की आशंका मजबूत हुई। - अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर चिंता
महंगाई के दबाव के बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। ऊंची ब्याज दरों की आशंका का असर वैश्विक इक्विटी बाजारों पर पड़ा। - मध्य-पूर्व का तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इससे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी। - व्यापक बिकवाली और कमजोर सेंटीमेंट
बैंकिंग, ऑटो और कई बड़े शेयरों में बिकवाली ने गिरावट को और तेज कर दिया। वित्तीय क्षेत्र करीब 1.8 प्रतिशत और ऑटो सेक्टर लगभग 2 प्रतिशत कमजोर रहा।
कौन से शेयर रहे दबाव में?
बाजार की गिरावट में कई प्रमुख शेयरों में कमजोरी देखी गई। BEL, टाइटन, बजाज फिनसर्व और अन्य बड़े शेयरों में गिरावट रही। हालांकि आईटी शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में मजबूती रही और HCL टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस और TCS जैसे शेयरों में तेजी दर्ज की गई।
आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?
अब निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, मध्य-पूर्व के घटनाक्रम और वैश्विक ब्याज दरों पर रहेगी। इन मोर्चों पर राहत मिलने से बाजार में स्थिरता लौट सकती है, जबकि तनाव बढ़ने पर उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना रहेगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा माहौल में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों से काफी प्रभावित हो रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय जोखिम और कंपनी के बुनियादी आंकड़ों को ध्यान में रखना अहम होगा।
