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चावल भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है, लेकिन सफेद चावल को ज्यादा मात्रा में खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में देश में उगाई जाने वाली कुछ पारंपरिक चावल की किस्में बेहतर विकल्प हो सकती हैं। इनमें फाइबर, खनिज और अन्य पोषक तत्व अपेक्षाकृत अधिक हो सकते हैं और कुछ किस्मों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) सामान्य सफेद चावल की तुलना में कम पाया जाता है। हालांकि GI किस्म, पकाने के तरीके और भोजन के साथ खाई गई अन्य चीजों से भी प्रभावित होता है।
1. काला चावल
काला चावल अपनी गहरी रंगत और एंथोसाइनिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट के लिए जाना जाता है। इसमें सामान्य सफेद चावल की तुलना में फाइबर और कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व अधिक हो सकते हैं। इसे मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से उगाया जाता है।
2. लाल चावल
लाल चावल की ऊपरी परत में प्राकृतिक रंगद्रव्य और फाइबर मौजूद होते हैं। केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और भारत के अन्य हिस्सों में इसकी अलग-अलग पारंपरिक किस्में मिलती हैं। कम पॉलिश किए जाने के कारण इसमें सफेद चावल की तुलना में अधिक पोषक तत्व सुरक्षित रह सकते हैं।
3. ब्राउन राइस
ब्राउन राइस वास्तव में ऐसा चावल है जिसमें चोकर और जर्म की परतें काफी हद तक बरकरार रहती हैं। इसलिए इसमें सफेद चावल की तुलना में फाइबर, मैग्नीशियम और कुछ अन्य पोषक तत्व अधिक होते हैं। भारत में इसकी खेती कई राज्यों में की जाती है।
4. बांसमती ब्राउन राइस
बासमती चावल का ब्राउन रूप भी सफेद बासमती की तुलना में अधिक फाइबर प्रदान करता है। चावल को कम पॉलिश करने से इसकी बाहरी पोषक परतें बनी रहती हैं। इसका GI सफेद चावल की तुलना में कम हो सकता है, हालांकि वास्तविक प्रभाव किस्म और पकाने की विधि पर निर्भर करता है।
5. मट्टा/केरल लाल चावल
केरल का मट्टा चावल, जिसे पालक्काड मट्टा भी कहा जाता है, एक पारंपरिक लाल चावल है। इसका स्वाद और बनावट सामान्य सफेद चावल से अलग होती है और कम पॉलिश किए जाने के कारण इसमें चोकर की परत से मिलने वाला फाइबर और पोषक तत्व मौजूद रहते हैं।
कौन-सा चावल चुनें?
अगर आपका उद्देश्य ज्यादा फाइबर और कम प्रसंस्कृत चावल खाना है, तो काला, लाल, मट्टा या ब्राउन राइस अच्छे विकल्प हो सकते हैं। लेकिन केवल चावल की किस्म देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि वह ब्लड शुगर नहीं बढ़ाएगा। मात्रा, पकाने का तरीका और साथ में खाई गई दाल, सब्जियां तथा प्रोटीन भी महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष: सफेद चावल को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। लेकिन भोजन में कभी-कभी कम पॉलिश किए हुए पारंपरिक चावल शामिल करने से आहार में फाइबर और पोषक तत्व बढ़ाए जा सकते हैं। खासकर डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को अपनी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार मात्रा तय करनी चाहिए।
