मुजफ्फरनगर में मानव तस्करी जैसा मामला सामने आया है। यहां एक ईंट भट्टे पर कई मजदूरों को बंधक बनाकर उनसे जबरन काम कराया जा रहा था। सूचना पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने सभी मजदूरों को मुक्त करा लिया है।
1. पूरा मामला क्या है?
मंगलवार को SDM और लेबर विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली कि जानसठ रोड पर एक ईंट भट्टे पर मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है छापेमारी में 23 मजदूर मिले, जिनमें 7 महिलाएं और 4 नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। ये सभी बिहार और झारखंड के रहने वाले थे मजदूरों को 3 महीने से कमरा बंद करके रखा गया था। दिन में 14-16 घंटे काम, खाने के लिए सिर्फ रोटी-दाल। पैसा मांगने पर मारपीट की जाती थी
2. कैसे फंसाए गए थे मजदूर?
ठेकेदार ने इन्हें “अच्छी सैलरी + रहने-खाने की सुविधा” का लालच देकर अपने गांव से लाया था एडवांस का जाल: ₹5,000-10,000 एडवांस देकर इनका कर्ज बना दिया गया। फिर ब्याज जोड़कर कर्ज कभी खत्म ही नहीं , भागने की कोशिश करने पर परिवार को जान से मारने की धमकी दी जाती थी। मोबाइल और आधार कार्ड भी भट्टा मालिक के पास थे .
प्रशासन की कार्रवाई
सभी 23 मजदूरों को बंधुआ मजदूरी प्रथा अधिनियम 1976 के तहत मुक्त घोषित किया गया। तुरंत मेडिकल जांच कराई गई , भट्टा मालिक और 2 मुंशी के खिलाफ FIR दर्ज। मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया। IPC की धारा 370, 374 और बंधुआ मजदूरी एक्ट लगी सरकार ने हर मजदूर को ₹20,000 की तात्कालिक सहायता दी। अब उन्हें रिहैबिलिटेशन स्कीम के तहत ₹1 लाख तक का मुआवजा मिलेगा और घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है
DM ने कहा: “ये मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। जिले में सभी ईंट भट्टों की जांच के आदेश दिए गए हैं। अगर कहीं और बंधुआ मजदूरी मिली तो सख्त कार्रवाई होगी”। ,संविधान का अनुच्छेद 23 बंधुआ मजदूरी को पूरी तरह बैन करता है। अगर आपके आसपास ऐसा कुछ दिखे तो 112 या लेबर हेल्पलाइन 181 पर कॉल करें।
