वॉशिंगटन: अमेरिका में भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। ट्रंप प्रशासन ने रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले PERM (Permanent Labor Certification) कार्यक्रम के तहत कई बड़ी IT कंपनियों की नई और लंबित अर्जियों की प्रोसेसिंग रोक दी है। इनमें भारत की प्रमुख IT कंपनियां Tata Consultancy Services (TCS), Infosys, Wipro और HCL Technologies शामिल हैं।
अमेरिकी श्रम सचिव की घोषणा के मुताबिक, इन कंपनियों के अलावा Cognizant और Capgemini को भी PERM कार्यक्रम से निलंबित किया गया है। वहीं Microsoft और Adobe पर भी इसी कार्यक्रम के तहत रोक लगाई गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह कार्रवाई कथित वीजा दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों पर असर से जुड़ी जांच के बीच की है।
क्या है PERM और इसका ग्रीन कार्ड से क्या संबंध?
PERM अमेरिका के रोजगार-आधारित इमिग्रेशन सिस्टम का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहा है। इसके बाद पात्र विदेशी कर्मचारी के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
यही वजह है कि इस फैसले का असर उन भारतीय IT कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो अमेरिका में नौकरी करते हुए अपने नियोक्ता के माध्यम से ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में हैं।
भारतीय कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
इस फैसले से इन कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड के लिए PERM प्रक्रिया में शामिल भारतीय कर्मचारियों को देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में मौजूद सभी भारतीय कर्मचारियों के H-1B वीजा या पहले से जारी ग्रीन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। मौजूदा H-1B वीजा पर इस आदेश का सीधा असर नहीं बताया गया है।
भारत के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय प्रोफेशनल्स अमेरिकी H-1B और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड सिस्टम के बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं। ऐसे में PERM प्रक्रिया रुकने से कई कर्मचारियों की अमेरिका में स्थायी निवास की योजना प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका ने क्यों लिया यह फैसला?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि H-1B और अन्य रोजगार-आधारित इमिग्रेशन कार्यक्रमों के दुरुपयोग की जांच की जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ कंपनियों की विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, संबंधित कंपनियों के खिलाफ कंपनी-विशिष्ट आरोपों और जांच के सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अमेरिकी श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित कंपनियों से जुड़ी नई PERM अर्जियां स्वीकार नहीं की जाएंगी और लंबित अर्जियों की प्रक्रिया भी रोकी जाएगी।
पूरी तरह ग्रीन कार्ड बैन नहीं
इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे “ग्रीन कार्ड पूरी तरह बैन” कहना सही नहीं होगा। कार्रवाई विशेष कंपनियों से जुड़ी PERM लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर है। इसलिए इससे उन कर्मचारियों की मौजूदा H-1B स्थिति या पहले से जारी ग्रीन कार्ड अपने-आप खत्म नहीं होते।
फिर भी, भारतीय IT कर्मचारियों के लिए यह अमेरिका में स्थायी निवास की राह में एक बड़ा व्यवधान माना जा रहा है और आगे अमेरिकी सरकार के फैसलों पर सबकी नजर रहेगी।
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