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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स में 1,000 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 72,000 के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 22,250 के नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
बाजार की इस कमजोरी के पीछे घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। खास तौर पर रिजर्व बैंक की सख्त नीति, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।
- RBI का सख्त रुख
बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण रिजर्व बैंक का मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख माना जा रहा है। RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों और कारोबार के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका बढ़ती है, जिसका असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा है। - कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बनाया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और आयात बिल दोनों को प्रभावित कर सकता है। - विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। विदेशी पूंजी की निकासी बढ़ने से प्रमुख शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है और इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिखाई दे रहा है। - कमजोर वैश्विक संकेत
भारतीय बाजार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी मजबूत सपोर्ट नहीं मिल रहा है। बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, महंगा तेल और वैश्विक स्तर पर आर्थिक एवं भू-राजनीतिक चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका असर एशियाई बाजारों समेत भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
बाजार में अचानक आई तेज गिरावट के बीच निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपनी निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है, खासकर जब तक ब्याज दर, कच्चे तेल और विदेशी निवेश से जुड़े संकेत स्पष्ट नहीं होते।
