नई दिल्ली। भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है और यही युवा आबादी देश के लिए सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। लेकिन NITI Aayog की अगस्त 2026 में जारी रिपोर्ट “Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047” ने युवाओं से जुड़ी एक बड़ी चुनौती की ओर ध्यान खींचा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 9 करोड़ युवा ऐसे हैं जो शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण (NEET—Not in Education, Employment or Training) से बाहर हैं। यह आंकड़ा NSS के 78वें राउंड के 2021 के आंकड़ों पर आधारित है।
युवा शक्ति का बड़ा हिस्सा सिस्टम से बाहर
NITI Aayog के अनुसार, NEET युवाओं में बड़ी संख्या ऐसी है जो रोजगार की तलाश भी नहीं कर रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समूह का करीब 88 प्रतिशत हिस्सा घरेलू कामों में लगा हुआ है। इसलिए इन आंकड़ों को सीधे तौर पर “कुछ नहीं कर रहे” युवाओं के रूप में देखना सही नहीं होगा।
रिपोर्ट में 15-29 वर्ष की आयु को NEET की परिभाषा के लिए इस्तेमाल किया गया है। इसमें वे युवा शामिल हैं जो शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण में नहीं हैं।
कौशल विकास सबसे बड़ी जरूरत
NITI Aayog ने रिपोर्ट में भारत के स्किलिंग सिस्टम के सामने कई बाधाओं की पहचान की है। इनमें सही जानकारी का अभाव, प्रशिक्षण तक पहुंच की समस्या, आर्थिक बाधाएं, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार से उसका सही जुड़ाव प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 43 प्रतिशत NEET युवाओं ने सही स्किलिंग कार्यक्रमों की जानकारी न होने को प्रशिक्षण नहीं लेने के प्रमुख कारणों में शामिल किया। इससे पता चलता है कि केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं तक सही जानकारी पहुंचाना और प्रशिक्षण को वास्तविक रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है।
भारत के लिए चुनौती भी, अवसर भी
भारत की बड़ी युवा आबादी देश के लिए demographic dividend यानी जनसांख्यिकीय लाभ का बड़ा अवसर है। लेकिन यदि बड़ी संख्या में युवा शिक्षा, रोजगार और कौशल प्रशिक्षण से बाहर रहती है, तो इस अवसर का पूरा लाभ उठाना मुश्किल हो सकता है।
NITI Aayog की रिपोर्ट इसी वजह से शिक्षा से रोजगार तक बेहतर संक्रमण, व्यावसायिक प्रशिक्षण को अधिक आकर्षक बनाने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने पर जोर देती है।
विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों युवाओं को केवल रोजगार की तलाश करने वालों के रूप में नहीं, बल्कि कुशल और उत्पादक कार्यबल में बदलने के लिए देश किस तरह की दीर्घकालिक रणनीति अपनाता है।
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