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लखनऊ, 15 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलावटी और एनालॉग डेयरी उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पनीर, घी और खोया समेत ऐसे उत्पादों पर कार्रवाई तेज कर दी है, जिनमें दूध की जगह गैर-डेयरी वसा या अन्य विकल्पों का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को वास्तविक और सुरक्षित डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
सरकार के मुताबिक, संबंधित ब्रांडों और उत्पादों के नमूने लेकर उनकी जांच की जाएगी। यदि जांच में हानिकारक रसायन या विदेशी वसा जैसे प्रतिबंधित अथवा असुरक्षित तत्व पाए जाते हैं, तो संबंधित ब्रांडों की राज्यभर में बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
क्या होता है एनालॉग डेयरी उत्पाद?
एनालॉग डेयरी उत्पाद ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जो देखने और इस्तेमाल में असली डेयरी उत्पाद जैसे लग सकते हैं, लेकिन उनमें दूध की वसा या अन्य डेयरी सामग्री की जगह वनस्पति तेल अथवा गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या तब पैदा होती है जब ऐसे उत्पादों की सही जानकारी लेबल पर दिए बिना उन्हें असली डेयरी उत्पाद के रूप में बेचा जाए।
पनीर और खोया पर विशेष नजर
त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी बढ़ाई गई है। हालिया कार्रवाई में मथुरा में एक डेयरी इकाई से बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर और सिंथेटिक दूध बरामद किए जाने की खबर सामने आई है। वहीं गाजियाबाद में भी बड़ी मात्रा में पनीर और खोया नष्ट कराया गया।
अधिकारियों की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बिकने वाले डेयरी उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों और उपभोक्ताओं को गलत जानकारी देकर उत्पाद न बेचे जाएं।
कई राज्यों में बढ़ी कार्रवाई
एनालॉग डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात में भी एनालॉग पनीर समेत कुछ गैर-डेयरी उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन राज्यों में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण को कार्रवाई का प्रमुख कारण बताया गया है।
उपभोक्ताओं के लिए संदेश: दूध, पनीर, घी और खोया खरीदते समय पैकेट पर दिए गए लेबल, सामग्री और लाइसेंस संबंधी जानकारी को ध्यान से देखना जरूरी है। संदिग्ध उत्पाद मिलने पर उसकी शिकायत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से की जा सकती है।
