July 18, 2026
man with laptop on desk terrified by stock market chart

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ईरान से जारी संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों, खासकर दुबई की अर्थव्यवस्था पर साफ़ दिखाई देने लगा है। पर्यटन, विमानन और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आई सुस्ती के कारण कई कंपनियों ने भर्ती पर रोक लगा दी है, जबकि कुछ ने कर्मचारियों की संख्या कम करना शुरू कर दिया है। इसका सबसे बड़ा असर भारतीय समेत प्रवासी कामगारों पर पड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार, कई प्रवासी कर्मचारियों की नौकरियां चली गई हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोगों के वेतन में भारी कटौती की गई है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई भारतीय कामगार रोजगार की तलाश में घर-घर जाकर काम मांगने को मजबूर हैं।
दुबई में रोजगार के अवसर कम होने से भारत में रहने वाले उनके परिवार भी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। विदेश से आने वाली रकम (रेमिटेंस) घटने से कई परिवारों के लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो खाड़ी देशों के श्रम बाजार और भारतीय प्रवासी समुदाय पर इसका असर और गहरा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में कंपनियां नए कर्मचारियों की नियुक्ति करने के बजाय खर्च घटाने पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में दुबई में रोजगार की तलाश कर रहे नए प्रवासियों के लिए भी अवसर सीमित होते जा रहे हैं। यदि क्षेत्रीय तनाव लंबा खिंचता है, तो पर्यटन, एविएशन और सेवा क्षेत्र की रिकवरी में भी समय लग सकता है।

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