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सोचिए, एक ऐसी जगह जहां सदियों से नहीं थमी कुरआन की आवाज…
तुर्की के इस्तांबुल में स्थित टोपकापी पैलेस अपनी भव्यता और उस्मानी इतिहास के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन इस ऐतिहासिक महल की सबसे खास बातों में से एक यहां चली आ रही कुरआन की तिलावत की परंपरा है।
महल के Sacred Relics Chamber यानी पवित्र अवशेष कक्ष में हाफिज बारी-बारी से कुरआन की तिलावत करते हैं। एक कारी के बाद दूसरा कारी जिम्मेदारी संभालता है, जिससे तिलावत का सिलसिला लगातार जारी रहता है।
करीब 500 साल पुरानी है परंपरा
ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत उस्मानी सुल्तान सलीम प्रथम के शासनकाल से जुड़ी है। 1517 में मिस्र पर उस्मानी विजय के बाद पवित्र अवशेषों को इस्तांबुल लाया गया और टोपकापी पैलेस में उनके संरक्षण के साथ धार्मिक गतिविधियों की परंपरा भी विकसित हुई।
तब से चली आ रही यह परंपरा करीब पांच सदियों बाद भी टोपकापी पैलेस की पहचान का हिस्सा बनी हुई है।
क्यों खास है टोपकापी पैलेस?
टोपकापी पैलेस करीब चार सदियों तक उस्मानी सुल्तानों के शाही केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण रहा। महल के पवित्र अवशेष कक्ष में इस्लामी इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण अवशेष संरक्षित हैं।
यही वजह है कि टोपकापी पैलेस सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि इस्लामी और उस्मानी विरासत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल भी माना जाता है।
