September 27, 2026
a person standing in front of a rock formation

Photo by Djamel Ramdani on <a href="https://www.pexels.com/photo/a-person-standing-in-front-of-a-rock-formation-27443104/" rel="nofollow">Pexels.com</a>



तुर्की। पूर्वी तुर्की में माउंट अरारात के पास मौजूद रहस्यमयी दुरुपिनार (Durupınar) फॉर्मेशन एक बार फिर चर्चा में है। करीब 157 मीटर लंबी और ऊपर से नाव जैसी दिखाई देने वाली इस प्राकृतिक संरचना को दशकों से कुछ शोधकर्ता धार्मिक ग्रंथों में वर्णित नूह की नाव से जोड़ते रहे हैं। अब अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने यहां कोर ड्रिलिंग शुरू की है, ताकि जमीन के नीचे मौजूद संरचना और नमूनों की वैज्ञानिक जांच की जा सके।
18 मीटर तक लिए जा रहे हैं नमूने
2026 के शोध अभियान में वैज्ञानिकों ने दुरुपिनार फॉर्मेशन की विस्तृत मैपिंग के साथ ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (GPR), LiDAR और अन्य भू-भौतिकीय तकनीकों का इस्तेमाल किया है। अब टीम ने करीब 18 मीटर तक गहराई से कोर सैंपल लेने का काम शुरू किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार इन नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी, जिससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि संरचना प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया से बनी है या इसके भीतर किसी मानवीय संरचना के अवशेष मौजूद हैं।
रडार में दिखे कोण और अंदरूनी संरचनाओं के संकेत
शोध टीम का दावा है कि पहले किए गए 3D रडार स्कैन में जमीन के नीचे कुछ सीधी रेखाएं, कोणीय आकृतियां, खाली स्थान और गलियारे जैसी संरचनाएं दिखाई दी हैं। टीम इन्हें संभावित आंतरिक संरचना से जोड़कर देख रही है। हालांकि, इन संकेतों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि अभी बाकी है।
ड्रिलिंग के दौरान क्या मिला?
हालिया रिपोर्टों के अनुसार ड्रिलिंग के दौरान एक जगह कठोर परत आने से ड्रिल बिट टूट गया। शोध परियोजना से जुड़े लोगों ने संभावना जताई है कि यह अत्यधिक खनिजीकृत या जीवाश्मीकृत लकड़ी जैसी सामग्री हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए इसे फिलहाल नूह की नाव की लकड़ी का प्रमाण कहना जल्दबाजी होगी।
इसी शोध अभियान के दौरान कुछ मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े मिलने की भी रिपोर्ट सामने आई है। इनकी सही उम्र और उत्पत्ति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है।
क्या सचमुच मिल गई नूह की नाव?
फिलहाल इसका जवाब नहीं है। दुरुपिनार फॉर्मेशन का नाव जैसा आकार जरूर लंबे समय से लोगों का ध्यान आकर्षित करता रहा है, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय में इसे लेकर मतभेद हैं। कई भूवैज्ञानिक इसे चट्टानों के मुड़ने, मिट्टी के प्रवाह और कटाव जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बनी संरचना मानते हैं। पहले के भूवैज्ञानिक अध्ययनों में भी इसे प्राकृतिक संरचना बताया गया है।
नई रडार तस्वीरें और ड्रिलिंग के नमूने इस बहस को फिर चर्चा में ले आए हैं, लेकिन अभी तक नूह की नाव के रूप में इसकी निर्णायक पुरातात्विक पुष्टि नहीं हुई है। नमूनों की प्रयोगशाला जांच और आगे के वैज्ञानिक अध्ययन के परिणाम इस रहस्य को समझने में महत्वपूर्ण होंगे।
दशकों पुराना रहस्य
दुरुपिनार फॉर्मेशन की पहचान 1959 में तुर्की के सेना अधिकारी इल्हान दुरुपिनार द्वारा हवाई तस्वीरों के माध्यम से की गई थी। तब से इसका असामान्य आकार इसे नूह की नाव की खोज से जोड़ने वाली कई परिकल्पनाओं का केंद्र बना हुआ है। 2026 का अभियान इस सवाल को आधुनिक तकनीक के साथ दोबारा जांच रहा है—क्या यह सिर्फ प्रकृति की बनाई अद्भुत भू-आकृति है या इसके भीतर वास्तव में कोई प्राचीन मानवीय संरचना छिपी है?
फिलहाल वैज्ञानिक निष्कर्ष का इंतजार है। जब तक ड्रिलिंग से प्राप्त सामग्री की स्वतंत्र प्रयोगशाला जांच और विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने नहीं आती, दुरुपिनार को नूह की नाव कहना एक परिकल्पना ही माना जाएगा, प्रमाणित पुरातात्विक तथ्य नहीं।

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