दुनिया भर मे मशहूर लखनऊ के 10 बेहद लज़ीज़ खाने


यूँ तो नवाबों का शहर लखनऊ अपनी खूबसूरती और विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है लेकिन यहाँ का अवधी खान-पान भी इस शहर को अलग पहचान देता है। लखनऊ खाने के पसंदीदा लोगों के लिए जन्नत माना जाता है।

अगर आप लखनऊ आए और यहां के मशहूर टुंडे के कवाब और इदरीस की बिरयानी नहीं खाई तो समझिए आपका लखनऊ घूमना बेकार हुआ। ऐसा नहीं है कि लखनऊ सिर्फ मासाहारी खान-पान के लिए ही मशहूर है, यहां पर आपको ऐसे शाकाहारी पकवान भी मिलेंगे जिसको खाकर आप उंगलियां चाटते रह जाएंगें।

टुंडे कवाब

लखनऊ की चौक बाजार स्थित टुण्डे की दुकान लगभग 112 साल पुरानी है। टुंडे कवाब की एक अलग दिलचस्प कहानी है। टुंडे का मतलब होता है विकलांग, मतलब जिस आदमी ने ये कवाब बनाने शुरू किये थे वह विकलांग था। टुंडे कवाब बनाने के लिए लगभग 100 प्रकार के मसालों का उपयोग किया जाता है। नवाब खाने पीने के शौकीन थे, लेकिन उम्र के साथ मुंह में दांत नहीं रहे तो उस अनुसार ही इस दुकान के मालिक ने ऐसे कवाब बनाने की सोची जिसे बिना दांत के भी आसानी से खाया जा सके।

बॉम्बे पाव भाजी

अगर आपको शाकाहारी खाने का मज़ा लेना है तो हजरतगंज के सेंट फ्रांसिस स्कूल के पास आप इसे खा सकते हैं। बॉम्बे पाव भाजी की सबसे खास बात यह है कि यह मक्खन में तला जाता है और इसे बनाने वाले हाइजीन का खासा ध्यान रखते हैं। इसकी कीमत 100 रूपये से भी कम है।

बाजपेई की कचौड़ी

यह दुकान लीला सिनेमा के पास स्थित है। बाजपेई कचौड़ी खाने के लिए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई और फिल्म जगत की भी कई नामचीन हस्तियां आ चुकी हैं। यहां की स्वादिष्ट कचौड़ियों की कीमत सस्ती होने की वजह से यहां पर आपको दूर से ही लम्बी कतारें देखने को मिलेंगीं।

बास्केट चाट

हजरतगंज रायल कैफे की बास्केट चाट चटपटा खाने वालों की पहली पसन्द है। लखनऊ में आपको इससे अच्छी चाट नहीं मिल सकती। अनार के दानों से सजी बास्केट चाट बनाने के लिए इसे खास तरीके के मसालों का प्रयोग किया जाता है। खट्टी मीठी इमली की चटनी और मटर आलू का सही मात्रा में मिश्रण ही यहां की चाट को खास बनाता है।

प्रकाश की कुल्फी

स्वादिष्ट खाने के बाद कुछ मीठा खाने का मन करे तो आप अमीनाबाद स्थित प्रकाश की कुल्फी खा सकते हैं। यह खास तरह की फालूदा कुल्फी क्रीम दूध, पिस्ता, काजू, कार्न फ्लोर और केसर के मिश्रण से बनाई जाती है। 1956 में स्थापित प्रकाश कुल्फी ने अपने ग्राहकों के लिए गोमती नगर में भी एक ब्रान्च खोल दी है।

पाया की नहारी

अवधी खान-पान में नहारी खाने वालों की भी बहुत संख्या है। इस पकवान के लिए चौक स्थित मुबीन और रहीम की नहारी पूरे शहर में लोकप्रिय है। नहार एक उर्दू शब्द है जिसका अर्थ है सुबह और इसीलिए यह पकवान सुबह के समय खाया जाता है। लखनवी पाया नहारी की खासियत यह है कि इसे 5-6 घंटों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है।

इदरीस की बिरयानी

अगर आप मटन बिरयानी के शौकीन हैं तो आपको इस होटल में जरूर खाना चाहिए। इससे स्वादिष्ट बिरयानी आपको पूरे लखनऊ में कहीं नहीं मिलेगी। इदरीस की बिरयानी कि खासियत यह है कि इसे कोयले की आंच पर बनाया जाता है और आग का इस्तेमाल नहीं होता है। यह होटल लखनऊ के कोतवाली चौक बाजार में स्थित है।



मक्खन मलाई

यह मिठाई एक खास किस्म की है और अगर आप सोचें की आपको ऐसी मिठाई और किसी शहर में भी मिल जाएगी तो आप गलत हैं। जी हाँ लखनवी मक्खन मलाई आपको सुबह के समय चौक के गोलदरवाजे पर मिलेगी। यह मिठाई ठण्ड के समय में इसलिए बनाया जाता है क्योंकि मक्खन और दही को ओस में रख कर फिर उसे घंटों फेटा जाता है ताकि नमि पाकर झाग फूलने लगे। अंत में केवड़ा चीनी और इलायची का मिश्रण करके इसे तैयार किया जाता है।

शर्मा की चाय

लखनऊ में चाय के शौकीन लोगों में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे शर्मा जी की चाय का पता न हो। शर्मा की चाय लखनऊ के लाल बाग में स्थित है। चाय के साथ बन-मक्खन और समोसा खाने वालों की यहाँ सुबह से शाम भीड़ लगी रहती है। शर्मा जी की चाय की खासियत यह है कि यहां पर जो भी एक बार चाय पी लेता है फिर उसको यह स्वाद भुलाना मुश्किल हो जाता है।
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