आखिर क्यों ओला-उबर कैब के चालक कर रहे हैं हड़ताल, इसका क्या असर होगा आपके शहर मे


मुंबई में करीब नौ दिनों से ओला और उबर कैब के चालक सड़कों पर हड़ताल कर रहे हैं।

तेल कीमतों में उछाल के अलावा विभिन्न प्रकार के खर्चों में हो रही बढ़ोतरी के मद्देनजर कैब चालकों की मांग है कि उनके किराये में भी इजाफा किया जाए। हालांकि एप से सेवा प्रदान करने वाली दोनों ही कंपनियां चालकों की इस मांग के पक्ष में नहीं हैं लेकिन चालक यूनियन के लगातार दबाव को देखते हुए संभव है कि इनकी मांगें स्वीकार कर ली जाएं।

क्या है हड़ताल की वजह और क्या होगा इसका प्रभाव ?

चालकों का कहना है कि इस साल पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में करीब 10 फीसदी इजाफा हो चुका है। साथ ही इंश्योरेंस और मेंटेनेंस खर्चा भी बढ़ गया है। दो साल पहले जहां 18-20 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत होती थी, वहीं अब यह 5-6 रुपये तक सिमट गया है। कुछ कैब चालकों का कहना है कि उनसे 1 लाख रुपये महीने कमाई का वादा किया गया था लेकिन 50 हजार भी नहीं मिल पा रहा है। अभी तो हड़ताल से मुंबई में ही संकट है लेकिन इसका जल्द समाधान नहीं हुआ तो बेंगलुरु, दिल्ली सहित अन्य शहरों में मुश्किल पैदा हो जाएगी।




क्या है कैब चालकों की प्रमुख मांगें?

बेस फेयर न्यूनतम 100 रुपये किया जाए, जो अभी 40 रुपये है।
प्रति किलोमीटर किराया 18-32 रुपये हो, जो अभी 6 रुपये है।
बड़ी कारों के लिए इससे भी ज्यादा किराये करने की मांग है।
सुरक्षा बढ़ाने के लिए राहगीरों की पहचान सरकारी डाटाबेस से कराने की मांग।

चालकों का कहना है कि बेस फेयर न्यूनतम 100 रुपये करने के साथ प्रति किलोमीटर किराया 18-32 रुपये हो। जबकि बड़ी कारों के लिए इससे भी ज्यादा किराया रखा जाए और सुरक्षा बढ़ाने के लिए राहगीरों की पहचान सरकारी डाटाबेस से करने के साथ ही कंपनी किसी चालक को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने के नियमों को ज्यादा जवाबदेह बनाए।

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राहगीरों पर हड़ताल का क्या असर है?

हड़ताल के चलते मुंबई में राहगीरों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए न सिर्फ घंटों इंतजार करना पड़ता है, बल्कि वे तीन गुना किराया भी चुका रहे हैं। पहले जहां 12 किलोमीटर के सफर के लिए 300 रुपये लगते थे, वहीं अब 1000 रुपये देने को मजबूर हैं।

कैसे निकलेगा समाधान

महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय कामगार संघ सोमवार को दो बार बातचीत के बाद मंगलवार शाम को भी राज्य यातायात आयुक्त के साथ मिलकर ओला-उबर कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने पहुंचा है। उम्मीद है कि समस्या का समाधान कर बुधवार से स्थिति सामान्य कर ली जाएगी।

आम आदमी की जेब पर बोझ दाल सकती है ओला-उबर चालकों की मांग

किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर मुंबई में करीब नौ दिनों से चल रही ओला-उबर चालकों की हड़ताल से वहां के राहगीर परेशान हैं। लेकिन अगर कंपनी ने इन चालकों की मांगें स्वीकार कर ली तो यह ग्राहकों की जेब पर और ज्यादा भारी पड़ सकता है।

इन चालकों का कहना है कि इस साल पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में करीब 10 फीसदी का इजाफा हो चुका है। इसके अलावा इंश्योरेंस और मेंटेनेंस खर्चा भी काफी बढ़ गया है। दो साल पहले जहां 18-20 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत होती थी, वहीं अब यह 5-6 रुपये तक सिमट गई है। कुछ कैब चालकों का कहना है कि उनसे 1 लाख रुपये महीने कमाई का वादा किया गया था लेकिन अब तो 50 हजार प्रति माह भी नहीं निकल पा रहा है। फिलहाल इस हड़ताल का मुंबई में सबसे ज्यादा असर है और दिल्ली में भी कुछ जगहों पर असर हो रहा है। लेकिन जल्द ही समाधान नहीं निकला तो बेंगलुरु सहित अन्य शहरों में भी संकट बढ़ सकता है।

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यात्री तीन गुना किराया चुकाने को मजबूर

हड़ताल के चलते मुंबई में यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए न सिर्फ घंटों इंतजार करना पड़ता है, बल्कि वे तीन गुना किराया भी चुका रहे हैं। पहले जहां 12 किलोमीटर के सफर के लिए 300 रुपये लगते थे, वहीं अब 1000 रुपये देने को मजबूर हैं।

कंपनी किसी चालक को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने के नियमों को ज्यादा जवाबदेह बनाए।

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