‘राम मंदिर पर कानून लाए मोदी सरकार’: RSS प्रमुख मोहन भागवत


विजयादशमी के अवसर पर मोहन भागवत ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांति, सहिष्णुता और सरकारों से निरपेक्ष मित्रवत संबंधों की रही है.

देश के रक्षा बलों को सशक्त बनाने और पड़ोसियों के साथ शांति स्थापित करने के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है. उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर यह भी कहा कि वहां नई सरकार आ जाने के बावजूद सीमा पर हमले बंद नहीं हुए हैं.

अर्बन नक्सल पर मोहन भागवत ने देशवासियों से अपील की कि वे समाज में ‘शहरी माओवाद’ और ‘नव-वामपंथी’ तत्वों की गतिविधियों से सावधान रहें. उन्होंने कहा, ‘दृढ़ता से वन प्रदेशों में अथवा अन्य सुदूर क्षेत्रों में दबाए गए हिंसात्मक गतिविधियों के कर्ता-धर्ता एवं पृष्ठपोषण करने वाले अब शहरी माओवाद (अर्बन नक्सलिज्म) के पुरोधा बनकर राष्ट्रविरोधी आन्दोलनों में अग्रपंक्ति में दिखाई देते हैं.’

मोहन भागवत ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्गों के लिए बनी हुई योजनाएं, उप-योजनाएं और कई प्रकार के प्रावधान समय पर तथा ठीक से लागू करने को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकारों को अधिक तत्परता और संवेदना का परिचय देने की एवं अधिक पारदर्शिता बरतने की आवश्यकता है.

अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज में सभी त्रुटियों को दूर कर, उसके शिकार हुए अपने बंधुओं को स्नेह एवं सम्मान से गले लगाकर समाज में सद्भावपूर्ण और आत्मीय व्यवहार का प्रचलन बढ़ाना पड़ेगा.

भागवत ने यह भी कहा, ‘‘अपनी सेना तथा रक्षक बलों का नीति धैर्य बढ़ाना, उनको साधन-संपन्न बनाना, नयी तकनीक उपलब्ध कराना आदि की शुरूआत हुई और उनकी गति बढ़ रही है. दुनिया के देशों में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ने का यह भी एक कारण है. उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन में पूर्ण-आत्मनिर्भरता के बगैर भारत अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त नहीं हो सकता.

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राम मंदिर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कुछ लोग राजनीति की वजह से जानबूझकर मंदिर मामले को आगे खींचते जा रहे हैं. मोहन भागवत ने कहा कि राम जन्म भूमि पर जल्द से जल्द राम मंदिर बनना चाहिए. सरकार को कानून बनाकर मंदिर निर्माण करना चाहिए. राम मंदिर का बनना गौरव की दृष्टि से आवश्यक है, मंदिर बनने से देश में सद्भावना व एकात्मता का वातावरण बनेगा.

राम मंदिर हिन्दू-मुसलमान का मसला नहीं है. यह भारत का प्रतीक है और जिस भी रास्ते से मंदिर निर्माण संभव है, मंदिर का निर्माण होना चाहिए.

मोहन भागवत ने कहा कि चुनाव में मतदान न करना अथवा NOTA के अधिकार का उपयोग करना, मतदाता की दृष्टि में जो सबसे अयोग्य उम्मीदवार है उसी के पक्ष में जाता है, इसलिए राष्ट्रहित सर्वोपरि रखकर 100 प्रतिशत मतदान आवश्यक है.

मोहन भागवत ने कहा कि समाज में सब कमियों को दूर कर उसके शिकार हुए समाज के अपने बंधुओं को स्नेह व सम्मान से गले लगाकर समाज में सद्भावपूर्ण व आत्मीय व्यवहार का प्रचलन बढ़ाना पड़ेगा.

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