झारखंड मे भूख से 3 दिन में 2 महिलाओं की मौत


झारखंड मे भूख से लगातार मौतें होने की वजह से सरकार और प्रशासन कटघरे मे है| बता दें कि पिछले साल सितंबर में सिमडेगा में भी 10 साल की एक बच्ची की भूख से मौत का मामला सामने आया था।

इस मसले पर सरकार का पक्ष रखते हुए राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने मीडिया से कहा कि पीडीएस सिस्टम में कोई खामी नहीं है और भूख से हो रही मौत की खबर बेबुनियाद है| दरअसल गिरिडीह की जो घटना है उसकी जांच हो चुकी है|

उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि जिलाधिकारी के मुताबिक महिला के खाते में 2,500 रुपये जमा थे| साथ ही उसका एक बेटा 7,000 कमा रहा है और दूसरे बेटे को भी 3,000 महीना मिल रहा है| भाई भी भरण पोषण करता है|

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मिला पेट में लिक्विड

जिस महिला की मौत सोमवार को हुई थी उसका नाम मीना मुहसर था। जिसकी उम्र 45 साल थी। वह बिहार के गया की रहने वाली थी। फिलहाल वह अपने बेटे गौतम के साथ चतरा जिले में ईंटखोरी के प्रेमनगर मुहल्ले में रहती थी। बेटे के अनुसार मौत का कारण भुकमरी है|

वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के पेट में लिक्विड मिला। तीन डॉक्टर डॉ. एसएन सिंह, डॉ. नंद किशोर प्रसाद जयसवाल और डॉ. सिद्धार्थ के मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया।

पुलिस के पंचनामा में महिला को टीबी होने जिक्र किया गया है। इसकी जांच के लिए विसरा बाहर भेजा जा रहा है।

प्रशासन ने जांच के आदेश दिए

चतरा डिप्टी कमिश्नर जीतेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि महिला की मौत कथित रूप से भूख से हुई है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
उधर, ईंटखोरी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र के डॉक्टर डीएन ठाकुर का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद मौत की वजह सामने आ सकेगी।




मंत्री के अनुसार मौत कि वजह भूख नहीं

मंत्री सरयू राय के मुताबिक महिला मानसिक तौर पर बीमार थी| यह भूख से मौत का मामला नहीं है| उनका कहना है कि भूख से मौत की खबर समझ से परे है| इस बारे में स्थानीय लोगों ने लिखित बयान दिया है| साथ ही बैंक स्टेटमेंट भी आ चुके हैं और जहां तक चतरा जिले की बात है तो 15 दिन पहले ही यह महिला बाराचट्टी बिहार से इटखोरी आई थी| ऐसे में कोई प्रावधान नहीं है कि उसका पीडीएस कार्ड बने|

कंकाल रह गया था महिला का शरीर

मां के शव को कंधे पर लादे बेटे की तस्वीर सामने आई है। जिसमें नजर आ रहा है कि महिला का शरीर सूखकर कंकाल रह गया था।

लाचार मां को कंधे पर लादे अस्पताल में भटकता रहा मजबूर बेटा

अस्पताल में मौजूद कुछ चश्मदीदों ने बताया कि बेटा अपनी मां को कंधे पर लादे रात करीब नौ बजे पहुंचा था। काफी देर तक वह इधर-उधर भटकता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। बाद में डॉक्टरों ने नब्ज टटोली और उसकी मां को मृत घोषित कर दिया।

शनिवार को महिला की भूख से मौत का दावा किया गया था

शनिवार को गिरिडीह जिले के मंगरगड्‌डी में 65 साल की सावित्री देवी की मौत का मामला सामने आया था। उसके परिवार वालों का दावा था कि तंगी की वजह से घर में तीन दिन से चूल्हा नहीं जला था।
पंचायत के मुखिया रामप्रसाद महतो और ब्लॉक के खाद्यान आपूर्ति पदाधिकारी शीतल प्रसाद काशी ने भी भूख को मौत की वजह बताया था। मृतका के घर में किसी भी सदस्य का राशनकार्ड नहीं था। उसे विधवा या वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिलती थी।
वह अपनी दो बहुओं और चार पोते-पोतियों के साथ गांव में रहती थी। बड़ा बेटा हीरालाल महाराष्ट्र के भुसावल में और छोटा बेटा हुलास

महतो उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक कंपनी में काम करता है। हुलास का कहना है कि उसकी इतनी कमाई नहीं थी कि पैसे घर पर भेज सके। हीरालाल का भी कहना है कि उसे छह महीने से वेतन नहीं मिला।
बहुओं कहा कहना है कि वह छह महीने से गांव में राशन मांगकर पेट पाल रहे हैं। 10 दिन पहले मां को स्वयं सहायता समूह ने तीन किलो चावल दिया था। वह खत्म होने के बाद घर में चूल्हा नहीं जला था।

पिछले साल सितम्बर में भी भूख से हुई थी बच्ची की

झांरखंड में ही सिमडेगा जलडेगा के कारीमाटी गांव में 28 सितंबर को 10 साल की संतोषी कुमारी की मौत हो गई थी। मां कोयली देवी का आरोप था कि बच्ची की मौत भूख से हुई। उसने चार दिन से कुछ नहीं खाया था। घर में खाना बनाने के लिए राशन नहीं था।

पिछले साल 28 सितंबर को झांरखंड मे ही सिमडेगा जलडेगा के कारीमाटी गांव में 10 साल की संतोषी कुमारी की मौत हो गई थी। तब भी उसकी मौत भूख से होने का दावा किया गया था।

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