दलित की बारात सर्वणों के इलाके से निकालने पर रोक


हाथरस के बसई बाबा गांव के रहने वाले 27 वर्षीय दलित नौजवान संजय कुमार के साथ हुई घटना आपको हैरान कर देगी |

संजय कुमार ने हाईकोर्ट में अपील कर ठाकुर बहुल गांव में रहने वाली दुल्हन के घर तक बारात निकालने की इजाजत मांगी थी, लेकिन यूपी सरकार की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने संजय की अर्ज़ी खारिज कर दी है|

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संजय की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में अलग से आदेश जारी करने का कोई औचित्य नहीं है| अगर दूल्हे या दुल्हन पक्ष के लोगों से कोई जोर-जबरदस्ती करे तब वे अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास जा सकते हैं|

साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस शिकायत दर्ज नहीं करती है या मदद नहीं करती है तो स्थानीय अदालत के जरिए केस दर्ज करवाया जा सकता है| गौरतलब है कि मामले में यूपी सरकार की तरफ से DM और SP की रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की गई थी, जिसके आधार पर ही कोर्ट ने केस खारिज किया|

बहाना बना कर नहीं दी इजाज़त

गौरतलब है कि दूल्हा और उसके परिवार वालों का आरोप है कि ठाकुर समुदाय नहीं चाहता कि उनके घर के सामने से कोई दलित बारात निकाले| वहीं जिला मजिस्ट्रेट आरपी सिंह और एसपी पीयूष श्रीवास्तव ने बारात निकालने के लिए इच्छित रास्ते का मुआयना करने के बाद नाले, कूड़े और चौड़ाई का हवाला देकर बारात निकालने की इजाजत देने से इनकार कर दिया|

अधिकारियों ने बारात निकालने की इजाजत न देने के पीछे यह भी बहाना दिया कि अब तक उस रास्ते से कभी जाटवों की बारात नहीं निकली| पिछले सप्ताह DM और SP ने दुल्हन के गांव निजामाबाद का दौरा किया. निजामाबाद कांसगज जिले के पड़ोस में है|




दूल्हे का योगी सरकार से पूछा ‘क्या मैं हिंदू नहीं हूं?’

दलित नौजवान संजय कुमार पिछले कुछ महीनों से ये सवाल सभी से पूछ रहे हैं| हर सरकारी दफ्तर को उसने इस संदर्भ में चिट्ठी लिखी है, चाहे वो स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर हो या राज्य डीजीपी, मुख्यमंत्री से लेकर एससी-एसटी कमीशन और स्थानीय मीडिया को भी उन्होंने पत्र लिखा है| यही नहीं उसने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भी लोगों से मदद मांगी है|

संजय कुमार कहते हैं, ‘संविधान कहता है कि हम सब बराबर हैं, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि हम सब हिंदू हैं| वे एक हिंदूवादी पार्टी के मुखिया हैं| फिर हमें ऐसी स्थिति का सामना क्यों करना पड़ रहा है|’ ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के सदस्य कुमार पूछते हैं, ‘क्या मैं हिंदू नहीं हूं? एक संविधान से चलने वाले देश में लोगों के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते|’

प्रशासन के पास नहीं हैं इन सवालों के जवाब

हाईकोर्ट ने सवर्णों के इलाके से दलित दूल्हे द्वारा बारात निकालने की अर्जी तो खारिज कर दी है, लेकिन इस मामले में कई अहम सवाल उठ खड़े हुए हैं|

पहला सवाल तो यही है कि अब दलित दूल्हे का परिवार क्या जाटवों द्वारा पारंपरिक रास्ते से ही बारात निकालेगा?

दूसरा सवाल कि अगर दूल्हे का परिवार जबरदस्ती सवर्णों के रास्ते से बारात निकालता है तो प्रशासन क्या कार्रवाई करेगी?

तीसरा सवाल कूड़े, नाले और चौड़ाई का हवाला देकर बारात निकालने की इजाजत नहीं देने वाला प्रशासन क्या बता पाएगा कि सवर्ण अब तक उसी रास्ते से बारात कैसे ले जाते थे?

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